इस दिल ने तेरी कमी को भी चाहा है
इन धड़कनों ने तेरी खामोशी को भी सुना है
फिर ऐसा क्या था जिसे मैं महसूस ना कर पाया
क्यों छोड़ गई मुझे तू इश्क की उन गुमनाम गलियों में जिसकी ना ही कोई मंजिल ना कोई मुसाफिर है
मैं जाऊं तो कहां एक तरफ तन्हाई का अंधेरा है
तो दूसरी तरफ तेरे ना होने का एहसास
इतनी हिम्मत भी नहीं कि तेरे बिना मैं मौत को छू लूं क्योंकि तेरे तन्हा होने का एहसास मुझे तन्हा मरने भी नहीं देगा
गुजरते हर एक लम्हे से तेरी जिंदगी के हर एक लम्हे के लिए मैंने बस हंसी की दुआएं मांगी है
यह सांसे चल तो रही है तेरे बगैर
मगर मुझे तेरे बिना एक पल भी जीना नहीं आता
पता नहीं तुम ना होकर भी दिल के किस हिस्से में मौजूद हो
कि तुम्हें खो कर भी तुम्हें खो जाने का डर आज भी सताता है।।
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Thursday, July 4, 2019
इस दिल ने तेरी कमी को भी चाहा है
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