Ek dhundhali si shaam se nikli kuch yaadein.......
मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं, पर सुना है सादगी मे लोग जीने नहीं देते। चाहता हूँ डूबना शराब ए ग़म में, परवरदिगार हैँ कि पीने नहीं देते। ख़ूब चाहता हूँ ठीक करना मगर चाक गिरेबाँ लोग सीने नहीं देते।