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Sunday, May 12, 2019

बड़े दिन हो गए

वो माचिस की सीली डब्बी,
वो साँसों में आग..
बरसात में सिगरेट सुलगाये *बड़े दिन हो गए*...।

एक्शन का जूता
और ऊपर फॉर्मल सूट...
बेगानी शादी में दावत उड़ाए *बड़े दिन हो गए*...।

ये बारिशें आजकल
रेनकोट में सूख जाती हैं...
सड़कों पर छपाके उड़ाए *बड़े दिन हो गए*.... ।

अब सारे काम सोच समझ कर करता हूँ ज़िन्दगी में....
वो पहली गेंद पर बढ़कर छक्का लगाये *बड़े दिन हो गए*...।

वो ढ़ाई नंबर का क्वेश्चन पुतलियों में समझाना...
किसी हसीन चेहरे को नक़ल कराये *बड़े दिन हो गए*.... ।

जो कहना है
फेसबुक पर डाल देता हूँ....
*किसी को* चुपके से चिट्ठी पकड़ाए *बड़े दिन हो गए*.... ।

बड़ा होने का शौक भी
बड़ा था बचपन में....
काला चूरन मुंह में तम्बाकू सा दबाये *बड़े दिन हो गए*.... ।

आजकल खाने में मुझे
कुछ भी नापसंद नहीं....
वो मम्मी वाला अचार खाए
*बड़े दिन हो गए*.... ।

सुबह के सारे काम
अब रात में ही कर लेता हूँ....
सफ़ेद जूतों पर चाक लगाए *बड़े दिन हो गए*..... ।

लोग कहते हैं
अगला बड़ा सलीकेदार है....
दोस्त के झगड़े को अपनी लड़ाई बनाये
*बड़े दिन हो गए*..... ।

वो साइकल की सवारी
और ऑडी सा टशन...
डंडा पकड़ कर कैंची चलाये
*बड़े दिन हो गए*.... ।

किसी इतवार खाली हो तो
आ जाना पुराने अड्डे पर...
दोस्तों को दिल के शिकवे सुनाये
*बड़े दिन हो गए*..........